ब्लॉगिंग क्या हैं ?

ब्लॉगिंग क्या हैं ?


अब ‘ ब्लॉगिंग ‘ क्या हैं ? इस प्रश्न का जवाब इस बात पर डिपेंड करता हैं कि आप अभी इस वक्त कहा पर हैं ? मतलब अगर आप ने अभी तक स्मार्टफोन की दुनिया में हाल ही में कदम रखा है तो आप इस शब्द से ही अनजान होंगे क्योंकि जब किसी के पास स्मार्टफोन पहली बार आता हैं तो वह अपनी पसंद के मूवी , गीत , वीडियो और दूसरी सर्फिंग करता हैं । शरूआत के लगभग दो महीने में से पहला हफ़्ता तो वह एक कोने में बैठकर स्मार्टफोन के फंक्शन को ही देखता रहता है , उसे समझता है । बाद में वह कुछ हद तक स्मार्टफोन चलाना सिख लेता है । उसके बाद बारी आती है दोस्तो वाले गेम्स , वीडियो और मूवीज़ की । वह उस दुनिया मे खो सा जाता हैं । बाद में उसके सामने स्मार्टफोन अपनी दुनिया खोलता है। क्योंकि जो वह सर्फिंग करता है उसी के मुताबिक गेम्स , एप्स व गूगल उसे एड्स दिखाता है । जिसमे शायद कभी न कभी ‘ ऑनलाइन पैसे कैसे कमाए ? ‘ से रिलेटेड कोई एड्स उसे दिखती ही है । बस यही से शरू होता है इस पूरी ब्लॉगिंग इंडस्ट्री का खेल ! और जब आप को कोई ये कह दे कि आप ऑनलाइन पैसे कमा सकते है – तो सीधी बात है कोई भी उसे जानना चाहेगा ! और बस यही से होता है किसी भी का ब्लॉगिंग का रास्ता ।

What is Blogging ?


अब वह खुद स्मार्टफोन में पैसे कमाने के तरीकों के बारे में ढूंढना शरू कर देता है । तब उसे यूट्यूब पर ऐसे बहुत से वीडियो मिलते है जिसमे बताया जाता है कि ‘ कैसे आप बहुत आसानी से महीने के 30,000 ₹ से लेकर 50,000 ₹ बड़ी आसानी से कमा सकते है । ‘ फिर क्या उसे तो बस विश्वास हो जाता है कि वाह भाई वाह ! इतना सारा पैसा कमा सकते है । बाकी की कसर वो वेबसाइट पूरा कर देती है जिसमे भी इसी तरह के आर्टिकल पब्लिश हुए होते है । और हर कोई ऑनलाइन पैसे कमाने के रास्ते पर निकल पड़ते है। ये तो सिर्फ़ एक इंसान की बात की है । जरा सोचिए आजकल करोड़ो समार्टफोन बिक हर रोज बिक रहे है। उनमें से बहुत से लोग ब्लॉगिंग में आ रहे है जिनमे से ज़्यादातर वो लोग होते है जो ऐसी ही पोस्ट या वीडियो देखकर ब्लॉगिंग की दुनिया मे आ जाते हैं । हर दिन हजारों ब्लॉग बन रहे हैं , लेकिन ‘ ब्लॉगिंग ‘ तो गिने चुने लोग ही कर रहे हैं ।

ब्लॉगिंग का इतिहास ◆

जैसा कि हमने बताया कि लोग ‘ बड़ी आसानी से पैसे कमाए जा सकते हैं ‘ सुनकर ब्लॉगिंग में आ जाते हैं । लेकिन ब्लॉगिंग आज कल की बात नहीं । जब से मानव इस धरती पर जन्म लेकर आया है तब से ब्लॉगिंग हो रही है । बस उस समय के तरीके और शायद उसका नाम कुछ और रहा है । जैसा कि दुनिया का सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद भी आखिर ऋषियों को आध्यात्मिक अनुभूति का लिखित रूप ही तो है । ये अलग बात है कि वह ईश्वरीय वरदान है । बाद में ऐतरेय ब्राह्मण जैसे ग्रंथ बने , फिर वेदांग , संहिताएं , रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्य से लेकर आज भी लिखी जाती कहानियां , काव्य सब एक तरह से देखे तो ब्लॉगिंग ही तो है। क्योंकि ब्लॉगिंग में इंसान खुद के अनुभव , ज्ञान व समज को ही तो सांझा करता हैं । हा , एक बात अलग है कि आज के डिजिटल युग मे उसका दायरा , मायने , क्षेत्र व लक्ष्य बदल गए है ।


ब्लॉगिंग किसी को देखकर , किसी का वीडियो देखकर या अचानक से शरू नही किया जा सकता । क्योंकि ब्लॉगिंग करने के लिए आपके पास संदर्भ ज्ञान , लिखने की कला , शब्दो पर पकड़ , और ख़ास तौर पर जुनून की आवश्यकता होती है । हा , टेक्निकल नॉलेज को आप सिख सकते हो , लेकिन जो बेजीक है वह आप के अंदर से आता है । उसे ना तो सिखाया जा सकता है , ना ही उसकी ट्रेनिंग हो सकती है । क्योंकि पेंटिंग , एक्टिंग , गायिकी , संगीत का आविष्कार ये सब कला आपके अंदर से आती है । हा , क्लासिस में उसे आप सिख सकते हैं लेकिन उसका शिखर तो आपके अंदर की कला ही पा सकती है । गाना कोई भी गा सकता है लेकिन लता मंगेशकर सिर्फ लता मंगेश्कर ही बन सकती हैं । अब सचिन को गाना गाने के क्लासीस में भेज दे तो वह सिख सकता है लेकिन लता मंगेशकर बनना उसके बस की बात नही हो सकती । वैसे ही लता मंगेश्कर सचिन तेंदुलकर नही बन सकती । वैसे दोनों ने अपने क्षेत्र में ‘ अच्छी ब्लॉगिंग ‘ की यह हक़ीक़त है ।


तो आखिर में यही कहना चाहते है कि ब्लॉगिंग और कुछ नही , आप के हुन्नर को दर्शाने वाला तरीका मात्र है । जिसे आप को कोई सीखा नही सकता । क्योंकि ये सिर्फ़ आप खुद कर सकते है वह भी तब ही जब आप सही मायनों में करना चाहे !

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